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सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा (यानि सोलर पावर) के कई फ़ायदे हैं - जैसे कि बिजली पर खर्च में बचत, प्रदूषण रहित बिजली उत्पादन, रखरखाव से छुटकारा और निवेश पर लम्बे समय तक लगातार लाभ। उत्तराखंड में घरेलु स्तर पर सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर पैनल) लगाने की लागत को अमूमन 3-6 वर्षों में बिजली बिल पर अर्जित बचत से वसूला जा सकता है। इस अवधि के बाद बचत की दर और भी ज़्यादा होती है, और यह सावधि जमा खाते (फिक्स्ड डिपॉजिट) की ब्याज दर से अधिक होती है। उत्तराखंड सरकार की कुछ सौर उर्जा स्कीमों में तो वास्तविक खपत के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड में वापिस डालने पर उत्पादक को यूनिट के आधार पर भुगतान भी किया जाता है, जो कि लगातार आय का एक अच्छा साधन बन सकता है। 

सोलर पैनल कहां लगाए जा सकते हैं?

 

अपने प्रांगण में ऐसी जगह चुनें जहां दिन में सर्वाधिक समय धूप रहती है। यदि यह जगह भवन की छत हो तो इस बात का अवश्य ध्यान रखे कि छत सोलर पैनलों के वजन के अनुसार मज़बूत हो।

 

सोलर पैनल में सबसे अधिक बिजली तब पैदा होती है जब इसपर सीधी धूप पड़ती है। परंतु धूप की दिशा समय और ऋतुओं के अनुसार बदलती रहती है। ऐसी स्थिति में सवाल यह उठता है कि सोलर पैनल किस दिशा में लगाए जाएं जिससे अधिक से अधिक बिजली का उत्पादन हो सके?

सोलर पैनल उन ढलदार छतों पर स्थापित किए जा सकते हैं जिनकी दिशा उत्पादन के अनुकूल हो । इसके अलावा सोलर पैनल उपयुक्त दिशा में लगाने के लिए विभिन्न प्रकार के फ्रेम भी उपलब्ध हैं।

 

सोलर पैनलों का मुख किस दिशा की ओर होना चाहिए?

 

भूमध्य रेखा के उत्तर वाले क्षेत्रों में सोलर पैनल का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। अधिकतम बिजली उत्पादन के लिए पैनल के झुकाव का कोण क्षेत्र के अक्षांश के बराबर होना चाहिए। उदाहरण के लिए, देहरादून (उत्तराखंड) में सोलर पैनलों का झुकाव लगभग 30° रखा जाता है।

A diagram illustrating a south-facing solar panel (PV module) with optimum tilt angle matching the latitude (Figure from Mohammed et al. 2019)

सोलर पैनल या तो स्थाई रूप से एक पूर्वनिर्धारित दिशा की ओर मुंह करके लगाए जा सकते हैं, या फिर मौसम के अनुसार इनकी दिशा बदलने के लिए विशेष उपकरण लगाए जा सकते है। हालांकि यह पाया गया है कि पैनलों की दिशा बदलने के उपायों को शामिल करने में इसकी लागत बढ़ जाती है। इसकी बजाय अतिरिक्त स्थाई पैनल लगाना किफायती साबित होता है।

कितने सोलर पैनल लगाए जाने चाहिए?

 

सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने से पहले उस जगह पर ऊर्जा की अंदाजन खपत का अनुमान लगा लेना चाहिए। अनुमानित खपत इस कैलकुलेटर की मदद से जानी जा सकती है।

 

सोलर पैनल लगाने में आने वाली प्रारंभिक लागत का अनुमान भारत सरकार द्वारा संचालित सौर ऊर्जा रूफटॉप कैलकुलेटर की सहायता ली जा सकती है। (https://solarrooftop.gov.in/rooftop_calculator)

उत्तराखंड में सौर उर्जा संयंत्र कैसे लगवाएं

 

सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की इस वेबसाइट पर पंजीकरण कराएं। https://usrp.upcl.org/

 

इसके बाद आवेदन के लिए संबंधित फॉर्म भर कर जमा करें।

 

यूपीसीएल द्वारा आवेदन की स्वीकृति व तकनीकी संस्तुति दिए जाने के बाद आपके द्वारा चयनित की गई अधिकृत कंपनी आपके भवन पर सोलर पैनल लगाने का काम करेगी।

 

पैनल लगने के बाद यूपीसीएल आपके कनेक्शन पर दोतरफा मीटर लगाएगा और सोलर संयंत्र को ग्रिड से जोड़ेगा। इस पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी इस वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।

 

सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए सरकार द्वारा अनुदान (सब्सिडी) योजनाएं चलाई जा रही हैं। योजनाओं के अंतर्गत सोलर पैनल की लागत पर रियायत दी जाती है, या उत्पादक द्वारा पैदा की गई अतिरिक्त बिजली उचित दाम पर सरकार द्वारा खरीदी जाती है जिससे उपभोक्ता को इसका निरंतर आर्थिक लाभ होता है। सोलर पैनलों को लगाने और इससे संबंधित दस्तावेजों के निस्तारण का काम अधिकृत कंपनी करती है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया आम नागरिकों और स्कूलों आदि संस्थानों के लिए काफ़ी सरल हो जाती है।  

 

सौर ऊर्जा से जुड़ी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी इस पुस्तिका में उपलब्ध है।

 

सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण बातें

 

सोलर पैनल से पैदा हुई बिजली को इस्तेमाल करने के लिए एक इनवर्टर की आवश्यकता होती है। इसलिए सोलर पैनल की संपूर्ण उपयोगिता के लिए अच्छे दर्जे का इनवर्टर का इस्तेमाल करना चाहिए।